नाकारा सिस्टम, नाकाम जनप्रतिनिधि और घुटनों पर व्यवस्थाएं

 नाकारा सिस्टम, नाकाम जनप्रतिनिधि और घुटनों पर व्यवस्थाएं

ओस की बूंदों से प्यास बुझाने का काम कर रहा नगरीय प्रशासन

इसे लाचारी कहें, लूटतंत्र कहें या भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में नाकामी, दो के निलंबन से मामला निपटाने का हो रहा प्रयास





राकेश चंद्र / बिजुरी

श्रीराम केवट

नर्मदा की पुकार ब्यूरो अनूपपुर


बिजुरी । सत्ता का नशा बहुत ख़तरनाक होता है जो अच्छों-अच्छों को बर्बाद कर देता है। इसकी बानगी देखनी हो तो जिले की बहुचर्चित नगर पालिका बिजुरी को आप देख सकते हैं। यूँ तो आम आदमी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए नगर सरकार का निर्माण करता है। किंतु उसका काम वोट देने के साथ ही समाप्त हो जाता है और उसके बाद शुरू होती है लूट सके तो लूट की कहानी जो पूरे पांच साल चलती है। राज्य के अंतिम छोर में स्थित नगर पालिका परिषद बिजुरी हमेशा से ही अपनी कार्यप्रणाली की वजह से सुर्खियां बटोरती रही है। बीते एक दशक से इस नगरपालिका का भ्रष्टाचार के साथ विवाद से नाता रहा है, अब इसे लाचारी कहें लूटतंत्र कहे या फिर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में नाकामी। यदि प्रशासनिक अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच की तो कई करोड़ के गबन का मामला सामने आ सकता है।


बागी कलम (बिजुरी) -

जहाँ एक ओर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के द्वारा कार्यक्रमों के बड़े-बड़े मंच के माध्यम से यह उदघोष किया जाता है कि हमारी सरकार में कहीं पर भी भ्रष्टाचार नहीं होगा और अगर भ्रष्टाचार हुआ तो जिम्मदारों पर सख्त कार्यवाही भी की जाएगी। लेकिन ठीक इसके विपरीत जिले के अंतिम छोर में मध्यप्रदेश की सबसे धनाढ्य नगरपालिका परिषद बिजुरी इन दिनों अपने अंधाधुंध विकास को लेकर सुर्खियों में हैं। वहीं करोड़ो की शासकीय राशि का व्यापक स्तर पर दुरुपयोग और बंदरबांट कैसे किया जाए, इसके लिए रोजाना ही नगरपालिका क्षेत्र में विकास के नए-नए आयाम गढ़े जा रहे हैं।


एक-दूसरे के आईने को मैला बता रहे जिम्मेदार -

सीएमओ नगर पालिका परिषद बिजुरी भ्रष्टाचार के नित नये कारनामे कर रही है, वहीं मीना कोरी के खिलाफ लगभग चार मामलों की हो चुकी हैं। ये सभी शिकायते जिला प्रशासन से लेकर कमिश्नर शहडोल व नगरी प्रशासन को की जा चुकी है। वर्तमान सीएमओ के द्वारा कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के उपर दबाव बनाकर व ठेकेदारों से सांठ-गांठ कर षडयंत्र पूर्वक उन्हें अवैध लाभ पहुंचाते हुए शासकीय धन (लोकधन) का गबन किया जा रहा है। गौरतलब है कि बीते 27 अपैल को ही सीएमओ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची थी, जहां उन्होंने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कुछ पार्षदों के विरुद्ध फर्जी भुगतान कराए जाने को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने व झूठे मामले में फंसा देने की धमकी भी दिए जाने के आरोप लगाए थे।


किसी बारूद से कम नहीं विनोद का लैपटॉप -

नपा बिजुरी में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर विनोज सोंधिया महज एक ऑपरेटर के पद पर पदस्थ हैं लेकिन सीएमओ की कृपादृष्टि से नपा के खजाने की चाबी इन्हीं के हाथों सौंप दी गई है। नपा में महज ऑपरेटर की हैसियत रखने वाले सोधियों के द्वारा नपा के यूजर आईडी का पूरा दुरूपयोग किया जाता है, साथ ही वे अपने निजी लैपटॉप में पूरे नपा की जानकारी समेट कर मनमाने तरीके से अपने चहेतों को भुगतान व जेम पोर्टल के माध्यम से सोंधिया के द्वारा जेम पोर्टल में सप्लायर्स का डेटा भी अपलोड किया जाता है और मन चाहे व्यक्ति या फर्म को एल वन बनाकर सीधे लाभ पहुंचाया जाता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि विनोद का लैपटॉप किसी भ्रष्टाचारी बारूद से कम नहीं है।


अध्यक्ष के कार्यकाल में भ्रष्टाचार को मिला बढ़ावा -

जिले की धनाढ़य नगरपालिका बिजुरी में भ्रष्टाचार का खेल खुलेआम चल रहा है, जिसे नगर की जनता साफ देख रही है। नगरवासियों ने नगर के चहुमुखी विकास के लिये एक पढ़े लिखे ईमानदार छवि के व्यक्ति को नगर का जनप्रतिनिधि चुना था ताकि नगर का विकास ईमानदारी पूर्वक सुंदर ढंग से हो सके। किन्तु नगरवासियों का कहना है बिजुरी नगरपालिका अध्यक्ष पुरूषोत्तम सिंह के अब तक के मौजूदा कार्यकाल के दौरान कई भ्रष्टाचार खुलेआम हुए और अब भी जारी है जिसके प्रमाण नगर में हर ओर दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति को हमने चुना वही व्यक्ति हमसे मिलने से कतराता नजर आता है। लोगों का कहना है अब नगर की जनता इस परिषद के कार्यकाल से पूर्णरुप से असंतुष्ट एवं त्रस्त हो चुकी है।


आज ईमानदार होना किसी अजूबे से कम नहीं -

जिले की अदभुत नगरपालिका जहाँ विकास के नाम पर खुला खेल खेला गया और लगातार खेला जा रहा है। जिस नगरीय निकाय अंतर्गत खुलेरुप में भ्रष्टाचार अपने चरम सीमा के पार पहुँच चुका है। जहाँ एक के बाद एक हुये भ्रष्टाचार की पोल जिले के कई अखबार व मीड़िया के माध्यम से प्नकाशित हुई। परंतु ना तो आज तलक हुये भ्रष्टाचार की न ही सही रूप से जाँच हुई और न ही नगरपालिका के जिम्मेदारों पर कोई कार्यवाही की गई। इससे साफ जाहिर होता है कि भ्रष्टाचार की जड़े और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों की साख कितनी मजबूत हैं। कोई कुछ भी लिखे या दिखाये इन्हें कोई परवाह ही नहीं पड़ता, क्योंकि इन्हें शायद यह ज्ञात हो चुका है कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता चाहे हम कुछ भी करें।


दो निलंबित और बाकी दोषियों को अभयदान -

नगरीय प्रशासन ने अपने जारी पत्र में नगरपालिका बिजुरी की पूर्व सीएमओ कमला कोल व वर्तमान उपयंत्री वंदना अवस्थी को निलंबित कर दिया है। जारी पत्र में इन दोनों को भ्रष्टाचार में दोषी पाया गया है वही लंबित शिकायत में वर्तमान सीएमओं व अन्य कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही न कर उन्हें अभयदान दे दिया है, जिसकी चर्चा गली चौराहों पर लोग करते नज़र आये। वही सूत्रों की माने तो खादी के दम पर पूरी कार्यवाही को दबाने का प्रयास हो रहा है, बहरहाल ओस की बूंदों से प्यास बुझाने का प्रयास प्रशासन करता नजर आ रहा है।

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